पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने कहा – “अगर कोई पार्टी लाइन के खिलाफ जाएगा तो कार्रवाई होगी”
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (Aam Aadmi Party) के राज्यसभा सांसद Raghav Chadha को पार्टी ने हाल ही में राज्यसभा में डिप्टी लीडर के पद से हटा दिया है। इस फैसले के एक दिन बाद राघव चड्ढा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “Silenced, not defeated” यानी “मुझे चुप कराया जा सकता है, लेकिन हराया नहीं जा सकता।”
राघव चड्ढा ने एक वीडियो संदेश में हिंदी में कहा कि वह एक ऐसी नदी हैं जो सही समय आने पर बाढ़ का रूप ले सकती है, जिससे संकेत मिलता है कि वह इस फैसले से पीछे हटने वाले नहीं हैं।
पार्टी का फैसला, समय-समय पर होते रहते हैं बदलाव
इस पूरे विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब के मुख्यमंत्री Bhagwant Mann ने कहा कि पार्टी के भीतर नेता और उपनेता बदलना एक सामान्य प्रक्रिया है।
उन्होंने कहा कि जब वह पहली बार चुनाव जीतकर संसद पहुंचे थे, तब पार्टी ने डॉ. धर्मवीर गांधी को नेता बनाया था और बाद में उन्हें स्वयं संसदीय बोर्ड का नेता बनाया गया था। मुख्यमंत्री के अनुसार ऐसे फैसले पार्टी समय-समय पर लेती रहती है।
“अगर कोई पार्टी लाइन के खिलाफ जाएगा तो कार्रवाई होगी”
प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूछे गए सवाल के जवाब में भगवंत मान ने कहा कि अगर कोई नेता पार्टी के सामूहिक फैसलों का समर्थन नहीं करता और पार्टी लाइन के खिलाफ जाता है, तो इसे पार्टी व्हिप के खिलाफ माना जाएगा।
उन्होंने कहा,
“लोकसभा और राज्यसभा में कई बार विपक्षी दलों को मिलकर फैसले लेने पड़ते हैं। अगर कोई व्यक्ति इन फैसलों का समर्थन नहीं करता और पार्टी लाइन के खिलाफ जाता है, तो उस पर कार्रवाई की जा सकती है।”
राघव चड्ढा पर “compromised” होने का आरोप
इसी दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राघव चड्ढा को “compromised” बताते हुए भी टिप्पणी की। हालांकि उन्होंने इस बारे में विस्तार से कुछ नहीं कहा, लेकिन उनके इस बयान से पार्टी के अंदर चल रहे मतभेदों की चर्चा तेज हो गई है।
AAP में क्या चल रहा है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राघव चड्ढा को डिप्टी लीडर पद से हटाया जाना आम आदमी पार्टी के अंदर चल रहे राजनीतिक समीकरणों का हिस्सा हो सकता है।
राघव चड्ढा को लंबे समय तक पार्टी नेतृत्व के बेहद करीबी नेताओं में गिना जाता रहा है, लेकिन हाल के घटनाक्रमों के बाद उन्हें पार्टी के अहम पद से हटाए जाने ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
निष्कर्ष
राघव चड्ढा का “चुप कराया जा सकता है, हराया नहीं” वाला बयान और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की कड़ी टिप्पणी इस बात की ओर इशारा कर रही है कि आम आदमी पार्टी के अंदर राजनीतिक तनाव बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद किस दिशा में जाता है।
