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नंगे पैर सीएम दरबार की ओर चल पड़ा एक पिता: पाबौ की जनता के हक के लिए गणेश भट्ट का संघर्ष

नंगे पैर सीएम दरबार की ओर चल पड़ा एक पिता: पाबौ की जनता के हक के लिए गणेश भट्ट का संघर्ष
AI Summaryसंक्षेप में

पौड़ी गढ़वाल: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मूलभूत सुविधाओं की कमी अक्सर चर्चा का विषय बनती रहती है। इसी समस्या को लेकर पौड़ी गढ़वाल के पाबौ ब्लॉक के सामाजिक कार्यकर्ता गणेश चंद्र भट्ट पिछले कई महीनों से संघर्ष कर रहे हैं। क्षेत्र की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, सड़क, शिक्षा और अन्य बुनियादी अधिकार दिलाने के लिए उन्होंने पहले लंबा धरना दिया और अब मुख्यमंत्री से मिलने के लिए नंगे पैर पैदल यात्रा शुरू कर दी है।


40 दिन के धरने के बाद भी नहीं सुनी गई आवाज

गणेश भट्ट ने पाबौ क्षेत्र की समस्याओं को लेकर करीब 40 दिनों तक कड़ाके की ठंड में धरना दिया। उनका मकसद सरकार और जनप्रतिनिधियों का ध्यान क्षेत्र की गंभीर समस्याओं की ओर दिलाना था।

हालांकि, उनका कहना है कि इस दौरान किसी भी राजनीतिक दल—चाहे बीजेपी, कांग्रेस, यूकेडी या अन्य दल—ने उनकी मांगों पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया।

सरकार तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए अब उन्होंने पैदल यात्रा का रास्ता चुना है, ताकि सीधे मुख्यमंत्री तक अपनी बात रख सकें।

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नंगे पैर पैदल यात्रा, रास्ते में झेल रहे कठिनाइयाँ

गणेश भट्ट पाबौ से देहरादून तक पैदल यात्रा कर रहे हैं। इस यात्रा के दौरान वे नंगे पैर चल रहे हैं, जिससे उनके पैरों में छाले भी पड़ चुके हैं।

फिर भी उनका कहना है कि यह संघर्ष किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि पाबौ क्षेत्र की जनता के अधिकार और विकास के लिए है।

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साथ चल रहे हैं दिलबर सिंह, बढ़ा रहे हौसला

इस संघर्ष में गणेश भट्ट अकेले नहीं हैं। उनके साथ Dilbar Singh भी कंधे से कंधा मिलाकर चल रहे हैं।

दिलबर सिंह लगातार उनके साथ कदम से कदम मिलाकर पैदल यात्रा में शामिल हैं और हर मुश्किल में उनका हौसला बढ़ा रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह आंदोलन अब केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की सामूहिक आवाज बनता जा रहा है।

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ये हैं उनकी प्रमुख मांगें

गणेश भट्ट की मांगें केवल एक मुद्दे तक सीमित नहीं हैं। वे पूरे क्षेत्र के विकास से जुड़ी कई समस्याओं को उठा रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं:

  • पौड़ी जिले में AIIMS जैसे बड़े और आधुनिक अस्पताल की स्थापना

  • पाबौ ब्लॉक में उप-जिला चिकित्सालय की व्यवस्था

  • पहाड़ी क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं

  • डोईवाला टोल टैक्स को समाप्त करने की मांग

  • ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार

उनका कहना है कि पहाड़ के लोगों को इलाज के लिए अक्सर देहरादून या बड़े शहरों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे गरीब और ग्रामीण लोगों को भारी परेशानी होती है।

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सोशल मीडिया पर मिल रहा लोगों का समर्थन

गणेश भट्ट के इस संघर्ष को अब सोशल मीडिया पर भी व्यापक समर्थन मिल रहा है। कई लोग फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म पर पोस्ट साझा कर उनके साहस और समर्पण की सराहना कर रहे हैं।

लोगों का कहना है कि एक अकेला व्यक्ति पूरे क्षेत्र की आवाज बनकर सरकार तक अपनी बात पहुंचाने की कोशिश कर रहा है, जो अपने आप में एक बड़ा उदाहरण है।


मीडिया में भी उठ रही आवाज

अब यह मुद्दा स्थानीय अखबारों और मीडिया में भी जगह बनाने लगा है। कई समाचार पत्रों में गणेश भट्ट की पैदल यात्रा और उनकी मांगों को प्रमुखता से प्रकाशित किया जा रहा है।

इससे उनके आंदोलन को और अधिक लोगों तक पहुंचने में मदद मिल रही है।


“यह यात्रा राजनीति के लिए नहीं, जनता के लिए है”

गणेश भट्ट का कहना है कि उनकी यह यात्रा किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है, बल्कि जनहित और क्षेत्र के विकास के लिए है।

उनका कहना है कि जब तक पहाड़ के लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलतीं, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।


एक व्यक्ति, लेकिन पूरी पहाड़ की आवाज

आज गणेश भट्ट का यह संघर्ष केवल एक व्यक्ति का आंदोलन नहीं रह गया है। यह पौड़ी गढ़वाल के पाबौ क्षेत्र की जनता की आवाज बन चुका है।

अब देखना होगा कि मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद सरकार इन मांगों पर क्या कदम उठाती है, और क्या पहाड़ के लोगों को उनकी जरूरी सुविधाएं मिल पाती हैं या नहीं।

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